October 24, 2026

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही क्यों लागू होता है ‘ग्रैप’ प्लान, जानिए किस स्टेज पर लगती हैं कौन-सी पाबंदियां

0
image

दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. आज यानी शनिवार को केवल नोएडा का लाइव एक्यूआई 303 दर्ज किया गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. हवा में पीएम 2.5 का स्तर 222 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का स्तर 269 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है. लगातार बिगड़ते इन हालातों के बीच प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि जब तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप-1) लागू है, तब तक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का इस्तेमाल न करें और सरकार के प्रयासों में सहयोग दें. लेकिन हर साल सर्दियों में चर्चा में आने वाला यह ‘ग्रैप’ प्लान आखिर है क्या, इसे कौन लगाता है और इसमें कौन-कौन सी पाबंदियां होती हैं?

ग्रैप यानी ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक आपातकालीन कार्य योजना है. आसान भाषा में कहें तो यह प्रदूषण के स्तर के आधार पर लागू होने वाले कड़े नियमों का एक सेट है. हवा जितनी खराब होगी, पाबंदियां उतनी ही सख्त होती जाएंगी. इसे पहली बार 2017 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था.

वर्तमान में ग्रैप को लागू करने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की है. सीएक्यूएम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमानों और वायु गुणवत्ता के आंकड़ों की लगातार निगरानी करता है. जब एक्यूआई एक निश्चित स्तर को पार कर जाता है या मौसम विभाग पूर्वानुमान जताता है कि अगले कुछ दिनों में हवा बेहद खराब होने वाली है, तो सीएक्यूएम ग्रैप के संबंधित चरण को लागू करने का आदेश दे देता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed